बनारस एक अनुभव…. Banaras is experience

काशी को कई नाम से जाना जाता है; कुछ कहते हैं बनारस है और कुछ वाराणसी, लेकिन बात एक ही है। बनारस में भक्ति है, अध्यात्म है और खाने के शौकीन लोगों के लिए न खत्म होने वाले व्यंजन हैं और जो लोग कला और संगीत के पारखी हैं, यह उनके लिए भी बहुत कुछ खास है। किसी ने सही कहा है,बनारस एक अनुभव है, एक तजुर्बा है; कोई यात्रा गंतव्य (travel destination) नहीं।

दिल्ली से बनारस आप चाहे तो वन्दे भारत , शिव गंगा एक्सप्रेस ट्रेन से जा सकते है लेकिन मुझे  दिल्ली बस अड्डा से वॉल्वो बस भी अच्छा माध्यम  लगा चूंकि मेरा यात्रा की योजना अचानक बनी तो जल्दी के लिए ये ऑप्शन बहुत अच्छा है। अच्छी बात यह है की  वृद्ध लोगो के लिए इस बस में सोने के लिए सीट भी है और टॉयलेट की व्यवस्था भी है। 

प्रयाग राज त्रिवेणी घाट के दर्शन करने के बाद आप लोकल बस से बहुत ही काम किरायें पर बनारस पहुँच  सकते है। जो वहां से कम से कम 125 की दूरी पर है।  बनारस में ही प्रसिद्ध बाबा विश्वनाथ मंदिर है। अब नया कॉरिडोर बनने के बाद बहुत सुवय्वस्था है जो देखने में  भव्य लगता है। मंदिर में कैमरा ,Mobile ले जाना माना है। तो आप पहले  लाकर (locker )की व्यवस्था चेक कर ले जहाँ ये सब चीज़ें सुरक्षित रख सके। 

काशी विश्वनाथ मंदिर यहाँ  सबसे मुख्य आकर्षण है जो 12 ज्योतिर्लिंगों में एक है और अब यहाँ नए कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर और भव्य लगता है साथ ही में सुव्यस्था भी अच्छी लगती है।

यूं तो काशी में 84 घाट है उनमे ये पांच मुख्य तीर्थ के रूप में देखे जाते है।  जिनमे से  अस्सी घाट , दश्वमेध घाट , मणिकर्णिका घाट, पंच गंगा , आदि केशव मुख्य हैं। 

दश्वमेध घाट- दश्वमेध घाट  में गंगा स्नान करके आप सीधे बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते है जो यहाँ से  काफी समीप ही हैं।  शाम के समय यहाँ आरती में शामिल होना न भूले , मेरे लिए तो यह  अविस्मरणीय समय था।

मणिकर्णिका घाट -हिन्दू मान्यता के अनुसार  यहाँ भगवान  शिव की चूड़ामणि और माँ पार्वती के कुण्डल गिरे थे इसलिए इसे  मणिकर्णिका  कहा गया । यह 51 शक्तिपीठो में से एक माना गया है इसलिए इसकी मान्यता  है। 

अस्सी घाट से गंगा नदी को निहारना शाम के समय मन को सुकून देता है क्योंकि तट बहुत फैला है और आती जाती नावें  आपको और खूबसूरत अनुभव देती है। 

अन्नपूर्णा मंदिर जो की काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप ही है और  जो माँ अन्नपूर्णा को समर्पित हैं। साथ ही मन हुआ BHU  घूमके देखा जाये , BHU यानि बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी  जो एशिया में बड़ी  शिक्षा संस्थान में से एक है।  यह पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा शुरू की गयी  थी।

इसके  साथ ही यहाँ तुलसीदास मंदिर , संकट मोचक , कालभैरव मंदिर , राम फोर्ट जैसे कई जगह आप जा सकते है। 

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