
रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) भाई बहिन के प्रेम के साथ तो जुड़ा है साथ ही में कुछ रोचक तथ्य भी साथ लिए है। ये बताने से पहले ये जानिए की हमारें मनीषियों ने मनुष्य जीवन के क्या चार पुरुषार्थ बतायें है और कैसे ये त्योहारों से जुड़े है। :-
- धर्म
- अर्थ
- काम (आनंद)
- मोक्ष
इसका अर्थ है की मानव को जीवन में धरम यानि पुण्य कर्म कमाने चाहियें साथ ही अर्थ यानि धन को भी अर्जित करना चाहियें। इसके साथ जीवन में आनंद की भी जरूरत है और अंतिम और मुख्य बात मोक्ष जिसमे इंसान जनम मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।
एक पूरे साल के त्योहारों को भी इसे हिसाब से विभाजित किया गया है जैसे दीपावली को अर्थ से जोड़ा गया है , होली को आनंद से ,दशहरा को धर्म से और क्योंकि रक्षाबंधन को मोक्ष से जोड़ा गया है इसका कारण है की रक्षाबंधन के दिन पावन श्रावणी का दिन भी मनाते है चूँकि ये त्यौहार सावन के पावन महीने में आता है जहाँ भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है इसलिए इस त्यौहार को मोक्ष से जोड़ा जाता है।
विशाल भारत के अलग अलग राज्यों में रक्षाबंधन किस तरह मनाया जाता है देखिये :–
ओडिशा में गमहा पूर्णिमा
ओडिशा में जहाँ भाई बहिन राखी के त्यौहार को प्यार से मनाते है। साथ ही गमहा पूर्णिमा या कहे श्रवण पूर्णिमा को श्री बलभद्रा के जनम दिवस रूप में मनाते है।चूँकि श्री बलभद्र श्री कृष्ण के भाई थे तो भगवान जगन्नाथ की पूजा प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में होती है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कजारी पूर्णिमा
कजारी पूर्णिमा को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में रक्षा बंधन के दिन मनाया जाता है। ये दिन किसानो की लिए महत्व का है क्योंकि मानसून खत्म होकर उनकी खेती के क्रियाकलाप शुरू हो जाते है तो वे लोग अच्छी उपज के लिए भी प्रार्थना करते है।
पश्चिम बंगाल में झूलन पूर्णिमा
पश्चिम बंगाल में राखी को झूलन पूर्णिमा के साथ मनाया जाता है जहाँ भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की पूजा की जाती है और उनको राखी बाँधी जाती है। और इस दिन बहने भाई को राखी बांधती है। सन्देश और रसगुल्ला खाया और खिलाया जाता है।
महाराष्ट्र नारली पूर्णिमा
महाराष्ट्र आदि के समुद्र तटीय क्षेत्रों में श्रावण पूर्णिमा (Sawan Purnima ) का पावन पर्व नारली या नारियल पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। मछुआरे भगवान वरुण की विशेष पूजा करते हैं और नारियल भगवान को चढ़ाते है समुद्र देवता से प्रार्थना करते है की समुद्र में उनकी रक्षा हो और मछली व्यवसाय बढ़ोतरी करे।साथ में बहिने भाई को राखी बांधती है। इस दिन मोदक, पूरन पोली बना कर खुशियां बाँटी जाती है।
तमिलनाडु और केरल में अवनि अवित्तम
तमिलनाडु और केरल में श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन अवनि अवित्तम (Avani Avittam) पर्व मनाया जाता हैं। यहां पर भी यह पर्व यज्ञोपवीत से जुड़ा होता है। यह मुख्य रूप से वेदपाठी लोगो की लिए बहुत महत्व रखता है। रक्षाबंधन के दिन यहां पर जनेउ धारण करने वाले लोग समुद्र के किनारे जाकर विधि-विधान से अपना यज्ञोपवीत बदलते हैं. इस पर्व में भगवान श्री विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा की जाती है।
उत्तराखंड में श्रावणी पर्व
उत्तराखंड में रक्षाबंधन के त्यौहार में बहिन भाई को राखी बांध कर शुभकामना देती है। साथ ही श्रावणी पर्व भी पूरे विधि-विधान से मनाया जाता है. इस दिन लोग नया यज्ञोपवीत यानि जनेउ धारण करते हैं और भगवान की पूजा अर्चना करते है।
आज आधुनिक समय में भी यह देखना सकारात्मक है की तमाम व्यवस्थाओ के बीच भी बहिने भाइयों के लिए रक्षाबंधन के लिए समय निकाल ही लेती है चाहे वो दूर देश में क्यों न हो और भाई भी उन्हें सुरक्षा (Protection )का आशीर्वाद और गिफ्ट (Gift) देना नहीं भूलते यही हमारी परम्पराओ (tradition) के लिए सकारात्मक (Positive ) बात है।