Delhi to Almora
उत्तराखंड एक छुपा हुआ प्राकर्तिक सुंदरता से भरा unexplored destination है । मैंने अपना बैग पैक किया और चल पड़ा दिल्ली से आनंद विहार स्टेशन की ओर । जहाँ से 5-6 घंटे की यात्रा के बाद पहंच गया हल्द्वानी जो की दिल्ली से 250 km की दूरी पर है। जैसे ही हल्द्वानी एक्सप्रेस ने आनंद विहार स्टेशन छोड़ा और बड़े लहलहाते खेत शुरू हुए तो पता चला की ताज़ी हवा का जादू क्या होता।
हल्द्वानी के काठगोदाम स्टेशन उतरने के बाद मैंने खोजना शुरू किया की कोई प्राइवेट गाड़ी पहाड़ो के लिए मिल जाये । गाड़ी मिलने के बाद अल्मोड़ा को Base Station बनाने का कारण था की यहाँ से बहुत से टूरिस्ट जगहों पर पहुंचा जा सकता था और रात तक आप वापिस अल्मोड़ा लौट सकते थे। हल्द्वानी से करीब 3-4 घंटे की यात्रा के बाद मैंने 100 km का सफर तय किया और शाम के 4 बजे पहुँच गया अल्मोड़ा । यहाँ अपने एक मित्र के घर पर रुकने के बाद मैंने निर्णय किया की पहाड़ो में रात का सफर नहीं किया जा सकता तो मैं आज अल्मोड़ा के लोकल मार्किट का आनंद लेता हूँ। रात को पहाड़ी बाजारों की रौशनी और छठा देखते ही बनती है क्योंकि आस पास की जगह अँधेरे से ढकी रहती है तो ये बाजार और ज्यादा चमकदार लगते है।अल्मोड़ा में ही लाला बाजार है जहाँ आप हर तरह के सामान खरीद सकते है।
बाजार घूमने के बाद अगले तीन चार दिनों के लिए मेरे पास एक लम्बी लिस्ट थी जिसे तैयार कर मैं सो गया।
- जागेश्वर
- बागेश्वर
- कसार देवीं
- गोलू देवता का मंदिर
- कौसानी
- सोमेश्वर घाटी
- बिनसर ट्रैक
गोलू देवता का मंदिर
अगले दिन सुबह मैं पहुंचा चितइ गोलू देवता के मंदिर जो अल्मोड़ा के सबसे निकट है। यहाँ लोग किसी विशिष्ट कामना की सिद्धि के लिए पूजा अर्चना भी करते है । लोक मान्यता के अनुसार गोलू देवता न्याय के देवता है यदि कोई सच्चे दिल से प्रार्थना करता है और पीड़ित है तो उसे न्याय मिलता है। जब कामना पूरी हो जाती है तो यहाँ घंटी और फल नारियल चढ़ाते है। यहाँ की हज़ारो लगी घंटियां देख कर मैं हैरान रह गया तो लोगो ने बताया की भक्तो ने कामना पूर्ण होने पर श्रद्धा स्वरुप इतनी घंटियां और लिखित पत्र चढ़ाये है।
जागेश्वर
अगले दिन सुबह तड़के मैं चला जागेश्वर मंदिर जाने के लिए जो की 35 km कम की दूरी पर। मन भाव देवदार के वृषो ने मनमोह लिया जिनके बीच में था ये प्राचीन मंदिर। इस मंदिर में माना जाता है की आदि शंकराचार्य का भी आगमन हुआ था। यह मंदिर भगवान शिव के बाल स्वरुप को समर्पित है। यहाँ इसके अलावा कई और छोटे मंदिरो का समूह है उनमे से प्रमुख मृतुन्जय मंदिर है। यह मंदिर परिसर Archaeological Survey of India के निगरानी में है और यहाँ का म्यूजियम देखना न भूले। यह परिसर चारो ओर से देवदार से घिरा है जो मन को अद्भुत शांति देता है।
कसार देवीं
दोपहर बाद मैं निकला कसार देवी मंदिर की ओर जहाँ स्वामी विवेकानन्द ने भी कभी तपस्या की थे यहाँ पहाड़ के शिखर से अल्मोड़ा डिस्ट्रिक्ट को निहारना बहुत मनोहर लगता है मन करता है की आप घंटो पेड़ो की छाव में यहाँ बैठे रहे। कुछ समय पूजा अर्चना करने के बाद समय था वापिस लौटने का क्योंकि शाम हो चली थे।
बिनसर फारेस्ट
अगले दिन सुबह तड़के ही हम चले बिनसर की और जहाँ कुमाऊँ मंडल का गेस्ट हाउस भी है और वहां से हमे पैदल जाना था। पूरा रास्ता तरह तरह के फूलों से भरा था यहाँ Birds Watchers के लिए कई तरह के मनमोहक पक्षी देखने को मिलेंगे। कुछ घंटो की ट्रैकिंग के बाद हम पहुंचे Himalaya View Point जहाँ से बर्फ से ढके पहाड़ देखते ही बनते है। पर इसके लिए आपकी किस्मत उस दिन अच्छी होनी चाहियें ताकि आपको मौसम साफ मिले।